Saturday, 14 July 2018

How successful is the prime minister's plan- Jan Dhan Yojna Online

How successful is the prime minister's plan

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के चार साल पूरे होने जा रहे हैं. सरकार प्रधानमंत्री जनधन योजना को महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर पेश करेगी. 28 अगस्त 2014 को शुरू इस योजना का प्रमुख लक्ष्य वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इनक्लूजन) रहा है. इस योजना के जरिये सरकार की कोशिश नए बैंक खातें खोलने के साथ ही सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचाने की रही है. वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिये पहले भी साल 2010 में "ओपन बेसिक सेविंग डिपोजिट अकाउंट स्कीम" नाम से योजना लाई गई थी. इसके अंतर्गत भी जीरो बैलेंस खाते खोलने का प्रवधान मौजूद था.

प्रधानमंत्री जनधन योजना भी जीरो बैलेंस अकाउंट के साथ कुछ अन्य सुविधायें प्रदान करती है. प्रधानमंत्री जनधन योजना में जमा राशि पर ब्याज के साथ ही एक लाख रुपए तक का दुर्घटना बीमा कवर दिया जाता है. इस योजना के अंतर्गत 30,000 रुपये का जीवन बीमा पॉलिसीधारक की मौत होने पर उसके नॉमिनी को दिया जाता है. विशेष लाभ के रूप मे छह माह तक खातों के संतोषजनक परिचालन के बाद ओवरड्राफ्ट की सुविधा का प्रावधान भी है.प्रधानमंत्री जनधन योजना की अधिकारिक वेबसाइट से प्राप्त आकड़ों के अनुसार. अब तक इसके अन्तर्गत कुल 31.60 करोड़ खाते खुले हैं. इन खातों में कुल ₹81203.59 करोड़ जमा हैं. ग्रामीण इलाकों में अब तक कुल 18.61 करोड़ नये खाते तो शहरी इलाकों में कुल 12.99 करोड़ खाते खुले हैं

More role of government banks

प्रधानमंत्री जनधन योजना में पब्लिक सेक्टर बैंकों ने निजी बैंकों की तुलना में अधिक योगदान किया है. पब्लिक सेक्टर बैंकों नें कुल 25.53 करोड़ खाते खोले हैं. प्राईवेट बैंकों ने महज 0.99 करोड़ खाते ही खोले हैं. पब्लिक सेक्टर बैंकों में इलाहाबाद बैंक, सेन्ट्रल बैंक और एसबीआई ने ज्यादा योगदान किया है. इलाहाबाद बैंक ने ग्रामीण इलाकों में कुल 60,23,893 अकाउंट, सेन्ट्रल बैंक आफ इंडिया ने ग्रामीण इलाकों में कुल 91,67,908 अकाउंट और स्टेट बैंक आफ इंडिया ने ग्रामीण इलाकों में कुल 4,44,03,353 खाते खोले हैं.

The biggest question?

जीरो बैलेंस खाता कभी भी वित्तीय समावेशन का पूर्ण तरीका नहीं हो सकता. प्रधानमंत्री जनधन योजना बड़ी संख्या में बैंक खाते खुलवाने में जरूर सफल रही है, पर वित्तीय समावेशन को लेकर अब भी सवाल खड़े हैं. वित्तीय समावेशन का मतलब गरीब तबके तक बैंकिंग सेवाओं और कर्ज की उपलब्धता से है. भले ही प्रधानमंत्री जनधन योजना ने 80,000 हजार करोड़ रुपये से अधिक जमा राशि जुटाई हो, पर यह योजना देश के एक बड़े तबके तक कर्ज़ पहुंचाने में असमर्थ रही है. प्रधानमंत्री जनधन योजना को ग्रामीण इलाकों में कर्ज की पहुंच को सुनिश्चित करना होगा, तब जाकर सहीं मायनों में यह योजना सफल मानी जायेगी.

No comments:

Post a Comment